Breaking News

क्या भारत पर मंडरा रहा है सबसे बड़ा आर्थिक तूफ़ान ? पश्चिम एशिया में युद्ध की आहट से 140 करोड़ भारतीयों की बढ़ी चिंता ।

विशेष रिपोर्ट

आदित्य सिंह की कलम से

दुनिया एक बार फिर ऐसे मोड़ पर खड़ी दिखाई दे रही है, जहाँ हजारों किलोमीटर दूर चल रही गोलियों और मिसाइलों की गूंज भारत की रसोई, भारत के बाजार और भारत की अर्थव्यवस्था तक सुनाई दे सकती है।

एजेंसी क्रिसिल के अनुसार डेरी प्रोडक्ट दूध, दही, सब्जी, फल, मछली, मीट सहित विदेश से आयातित मेडिसिन raw material के दामों में 5 से 15 फीसदी तक की वृद्धि हो सकती है

ePaper Madya Pradesh की टीम ने इंदौर दवा बाजार व्यापारियों से इस विषय पर चर्चा की ।

पश्चिम एशिया में इज़रायल, ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ता तनाव केवल क्षेत्रीय संघर्ष नहीं रह गया है। अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों की नजर अब उस संभावना पर है कि यदि यह टकराव व्यापक युद्ध में बदलता है तो उसका सबसे गहरा आर्थिक असर उन देशों पर पड़ सकता है जो ऊर्जा आयात पर अत्यधिक निर्भर हैं। भारत उनमें सबसे प्रमुख देशों में शामिल है।

भारत आज दुनिया की सबसे बड़ी आबादी वाला देश है। 140 करोड़ से अधिक लोगों की ऊर्जा, परिवहन और औद्योगिक जरूरतें बड़े पैमाने पर आयातित तेल और गैस पर निर्भर हैं। ऐसे में यदि पश्चिम एशिया में युद्ध की आग और भड़कती है, तो इसका सीधा असर भारतीय परिवारों के मासिक बजट पर पड़ सकता है।

अमेरिकी कानून के तहत राष्ट्रपति सीमित अवधि तक सैन्य कार्रवाई जारी रख सकते हैं, जिसके बाद कांग्रेस की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। इसी बीच अमेरिका और इज़रायल की सामरिक साझेदारी लगातार मजबूत बनी हुई है।

इज़रायल गाजा और उससे जुड़े क्षेत्रों में अपने सैन्य अभियान जारी रखे हुए है, जबकि अमेरिका की ओर से सैन्य सहायता और रसद समर्थन लगातार पहुंच रहा है।

दूसरी ओर ईरान और पश्चिमी देशों के बीच बढ़ते मतभेद इस आशंका को जन्म दे रहे हैं कि स्थिति किसी बड़े टकराव की ओर बढ़ सकती है। यदि ऐसा होता है तो सबसे बड़ा खतरा केवल युद्ध नहीं होगा, बल्कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर उसका प्रभाव होगा।

विशेषज्ञों की चिंता का केंद्र होर्मुज़ जलडमरूमध्य है। दुनिया के तेल व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी समुद्री मार्ग से गुजरता है। यदि यह मार्ग किसी सैन्य संघर्ष के कारण प्रभावित होता है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आ सकता है।

और यहीं से भारत की चिंता शुरू होती है।
महंगा तेल केवल पेट्रोल और डीज़ल की कीमत नहीं बढ़ाता। इसके साथ बढ़ती है परिवहन लागत, खाद्यान्न की कीमतें, औद्योगिक उत्पादन का खर्च और आम आदमी की रोजमर्रा की जरूरतों का बोझ।

एक युद्ध का असर हजारों किलोमीटर दूर बैठे भारतीय किसान, मजदूर, कर्मचारी और छोटे व्यापारी तक महसूस कर सकते हैं।

भारत पहले भी वैश्विक संकटों की कीमत चुका चुका है। कोविड महामारी के दौरान आपूर्ति श्रृंखलाएं प्रभावित हुईं, रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान ऊर्जा बाजारों में उथल-पुथल देखने को मिली और अब पश्चिम एशिया का नया संकट एक और चुनौती के रूप में सामने खड़ा दिखाई दे रहा है।

सबसे बड़ी चिंता यह है कि यदि पश्चिम एशिया में संघर्ष बढ़ता है और साथ ही रूस-यूक्रेन युद्ध भी जारी रहता है, तो वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दोहरा दबाव बन सकता है। ऐसी स्थिति में विकासशील देशों की अर्थव्यवस्थाएं सबसे पहले प्रभावित होती हैं और भारत भी इससे अछूता नहीं रह सकता।

आज सवाल केवल यह नहीं है कि इज़रायल और ईरान के बीच क्या होगा। असली सवाल यह है कि यदि युद्ध की यह आग और फैली तो उसकी तपिश भारत के करोड़ों परिवारों तक कितनी पहुंचेगी।

दिल्ली के किसी कार्यालय में काम करने वाला कर्मचारी, मध्य प्रदेश का किसान, बिहार का मजदूर, महाराष्ट्र का ट्रक चालक और उत्तर प्रदेश का छोटा दुकानदार—शायद उन्हें पश्चिम एशिया के युद्धक्षेत्रों की भौगोलिक स्थिति न पता हो, लेकिन यदि तेल महंगा हुआ, महंगाई बढ़ी और आर्थिक दबाव बढ़ा, तो सबसे पहले असर इन्हीं लोगों के जीवन पर दिखाई देगा।

युद्ध चाहे किसी भी देश में शुरू हो, उसकी सबसे बड़ी कीमत हमेशा आम नागरिक चुकाता है। और यदि पश्चिम एशिया का संकट और गहराता है, तो भारत के सामने केवल विदेश नीति की चुनौती नहीं, बल्कि 140 करोड़ लोगों की आर्थिक सुरक्षा की चुनौती भी खड़ी हो सकती है।

आने वाले दिनों में दुनिया की निगाहें पश्चिम एशिया पर होंगी, लेकिन भारत की निगाहें अपनी अर्थव्यवस्था, महंगाई और आम नागरिक के भविष्य पर टिकी रहेंगी।

क्योंकि यदि युद्ध बढ़ता है, तो उसकी सबसे बड़ी परीक्षा शायद रणभूमि में नहीं, बल्कि भारत के घर-घर में दिखाई दे सकती है।

About adminraj

Check Also

पंचशील कालोनी मुसाखेडी सार्वजनिक हनुमान मंदिर बचाने के लिए आंदोलन ।

इंदौर । पंचशील नगर मुसाखेड़ी में हनुमान मंदिर बना हुआ है उस मंदिर को तोड़कर …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Contact Us