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इंदौर में भारत के संविधान को खोजने वाली महिला !

19 नवंबर 1961 से भारतीय संविधान की मुख्य प्रति में से एक की छाया प्रति बनी इंदौर वासियों के लिए आकर्षण का केंद्र।

देश की अधिसरोचना और मानव अधिकारों के संरक्षण के मूल, देश का संविधान जिसकी मुख्य प्रतियों में से एक छाया प्रति 19 नवंबर 1961 से इंदौर की देवी अहिल्या लाइब्रेरी में मौजूद है। हालांकि बीते कई सालों में संविधान की यह प्रति कहीं ग़ुम सी हो गई थी, लेकिन इसे एक बार फिर लाइब्रेरी इंचार्ज लिली डावर ने न सिर्फ ढूंढ निकाला है, बल्कि संविधान की मूल प्रति को कुछ इस तरह से सजाया है कि अब यह लोगों के आकर्षण का केंद्र बन गई है। इंदौर की देवी अहिल्या लाइब्रेरी में पहुंचने वाले युवा, बुजुर्ग और महिलाएं संविधान की इस प्रति को ना सिर्फ बारीकी देख और पड़ कर समझ रहे हैं, बल्कि देश में आम आदमी के अधिकारों को संरक्षित करने वाले देश की अधिसरोचना के मूल भारत के संविधान के साथ अपने फोटो भी ले रहे हैं। जिससे ना सिर्फ भारत संविधान के प्रति लोगों की जिज्ञासा बड़ी है । बल्कि इंदौर में भारत के संविधान युवाओं का स्टेटस सेल्फी आइकन भी बन गया है।

अंबेडकर की टीम के पंडित दीनानाथ भार्गव की खोज है संविधान के शेर।

दरअसल लाइब्रेरी इंचार्ज लिली डावर के मुताबिक भारत के संविधान पर छपे 3 शेरों को लेकर बड़ी दिलचस्प दास्तान सामने आई है। कम ही लोग इन शेरों के पीछे की कहानी जानते हैं। दरअसल जब डॉक्टर भीमराव अंबेडकर अपनी टीम के साथ संविधान को मूल स्वरूप देने में जुटे थे। उस दौरान संविधान के मुख्य पृष्ठ की जिम्मेदारी पंडित दीनानाथ भार्गव को सौंपी गई थी। कई दिनों विचारों की गहराइयों में जाने के उपरांत पंडित दीनानाथ भार्गव एक दिन प्राणी संग्रहालय पहुंचे यह उन्हें शेर का एक परिवार दिखा। वह उससे इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने संविधान में 3 शेरों को बतौर सिंबल जगह दी । पहला शेर जो मुख्य आकृति में नजर आ रहा है नर है । दूसरा शेर माधा है और तीसरा उनका बच्चा । इन तीनों को देखने के बाद इस तरह की सिंबॉलिक आकृति पंडित दीनानाथ भार्गव ने भारत के संविधान के मुख्य पत्र पर दी । जो आज दुनिया हमारे संविधान को एक अलग ही स्वरूप और पहचान देती है।

संविधान के साथ सेल्फी

आपने सेल्फी के लिए पहाड़ों से लेकर नदियों तक, शॉपिंग मॉल से लेकर सिनेमा हॉल तक, लोगों की होड़ देखी होगी, लेकिन इंदौर में इन दिनों संविधान भारत के संविधान के साथ सेल्फी की होड़ लगी है । दरअसल देश की प्रभुता, अखंडता और मानव अधिकार के संरक्षण का मूल मंत्र भारत का संविधान है। जिसकी मुख्य प्रतियो में से एक इंदौर की देवी अहिल्या लाइब्रेरी में भी मौजूद थी। गत वर्षो में इसे हाईलाइट नहीं किया गया, लेकिन अब नई लाइब्रेरी इंचार्ज लिली डावर ने ना सिर्फ इस संविधान को उसके अधिकार की जगह दी बल्कि अब भारत के संविधान की बड़ी किताब लोगों की जिज्ञासा का विषय भी बन गई है । जिसके चलते इंदौर की देवी अहिल्या लाइब्रेरी पहुंचने वाले नौजवान ,बुजुर्ग ,महिलाएं पुरुष सभी भारत के संविधान की प्रति के साथ अपने छायाचित्र ले रहे हैं और खुद को गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं।

दरअसल भारत का संविधान दुनिया का एक ऐसा संविधान है । जिसने दुनिया के सभी संविधानो से मुख्य सार लेकर, देश की अखंडता और प्रभुता को बनाए रखने के लिए कई अनुच्छेदों को जोड़ा गया है। जो पूरी दुनिया में तारीफ के काबिल है । अब नौजवानों का भारत के संविधान के प्रति बढ़ता ही आकर्षण निश्चित ही एक शुभ संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। जिसके लिए ना सिर्फ इंदौर की देवी अहिल्या लाइब्रेरी के कर्मचारी गण बल्कि शहर के नौजवान , पुरुष महिलाएं सभी इसके प्रति अपना आकर्षण जाहिर कर रहे हैं।

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