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एमपी में शराब होगी सस्ती, केबिनेट में पास किया प्रस्तावित आबकारी नीति, सीमा से सटे राज्यो में पहले लागू है यह निति।

भोपाल। एमपी में नई आबकारी नीति को मंजूरी मिल गई है। नई शराब पॉलिसी के चलते विदेशी यानी अंग्रेजी शराब सस्ती होगी। इससे शराब की डिमांड बढ़ेगी, और ज्यादा बिक्री होगी। दरअसल मध्य प्रदेश के सीमा से लगे राज्य, जिसमे राजस्थान, उत्तर प्रदेश शामिल है, यहां पहले से यह निती लागू है। जिसमे शराब की दरे मध्य प्रदेश से बेहद कम थी, जिससे वहां की सरकारों को ना सिर्फ अच्छा राजस्व मिल रहा था, बल्कि राज्यों में नकली शराब की तस्करी ना के बराबर थी। अब एमपी भी उसी रास्ते पर निकला है।

सरकार ने घर पर शराब रखने की सीमा भी बढ़ा दी है। अब लोग 4 गुना ज्यादा शराब घर पर रख सकते हैं। नए वित्तीय वर्ष यानी 1 अप्रैल 2022 से ये नीति लागू होगी।

मध्य प्रदेश में सस्ती होगी शराब, नई नीति का ऐलान हुआ है, जिसके चलते अब

1. विदेशी शराब में 10%-13% तक ड्यूटी में कमी लाई गई है यानी अंग्रेजी शराब सस्ती होगी।

2. दुकानें कंपोजिट होंगी यानी एक ही दुकान पर अंग्रेजी और देशी दोनों शराब मिल पाएंगी।

MP में फ्रेश बीयर के लिए पॉलिसी इस प्रकार है

भोपाल, इंदौर के लिए माइक्रो ब्रेवरीज बनाई जाएंगी। माइक्रो ब्रेवरीज छोटी यूनिट होती हैं, जिनमें रोज 500 से 1000 लीटर शराब बनाने की क्षमता होती है। माइक्रो ब्रेवरीज प्लांट होटलों में लगाए जा सकते हैं। इनमें फ्रेश बीयर (कम एल्कोहल वाली शराब) मिल सकेगी। जिससे इसकी खपत बढ़ेगी और ग्राहकों को भी फायदा है। साथ ही गुणवक्ता युक्त माल उपभोक्ताओं को मिलेगा।

होम बार लाइसेंस मिल सकेगा:

मध्यप्रदेश सरकार ने होमबार लाइसेंस का ऐलान भी कर दिया है। अगर किसी व्यक्ति की सालाना आय 1 करोड़ रुपए है तो वह व्यक्ति घर पर बार खोल सकता है। इसके अलावा घर पर शराब रखने की लिमिट भी सरकार ने बढ़ा दी है। अब लिमिट की 4 गुना शराब रख सकते हैं। फिलहाल घर में एक पेटी बीयर, 6 बॉटल वाइन या 4 बॉटल स्पिरिट रखने की इजाजत है।

दो जिलों में महुए की शराब:

आलीराजपुर और डिंडौरी में पायलट प्रोजेक्ट के तहत महुए से बनने वाली शराब लाई जा रही है।

एयरपोर्ट्स-मॉल के लिए मंजूरी:

एयरपोर्ट पर अंग्रेजी शराब की दुकानें होंगी। मॉल्स में काउंडर पर वाइन भी मिल सकेगी।

ये मुख्य फैसले भी है शामिल:

मोनोपॉली वाले 17 बड़े जिले 2019-20 में जब वो छोटे लेवल पर चलते थे, उनमें डिस्पोज किया जाएगा। बाकी के छोटे जिलों को रिन्यूअल का ऑफर दिया जाएगा। फॉरेन लिकर यानी विदेशी शराब की रिजर्व प्राइज 15% और देशी की 25% रखी जाएगी। आप को बता दे कि गत वर्षों में शराब के महगे होने से नकली शराब का चलन भी बड़ा था। सस्ती शराब खरीदने के चलते लोग सीधे मौत खरिद रहे थे। वहीं सरकार को भी मोनोपाली से कोई खास फायदा हासिल नहीं हुआ। लिहाजा एक बार फिर शराब नितियों को लेकर केविनेट ने नए सिरे से रिव्यु किया है। जो की सीमा से लगे राज्यों में पहले से लागू है। शराब निति से फायदे और आम लोगों उपभोक्ताओं की सेहत को लेकर कहा जा सकता है कि देर आए पर दुरुअस्त आए।

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